तारें टिमटिमाते हैं,किंतु चंद्रमा तथा ग्रह नहीं टिमटिमाते हैं क्यों ?

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👉 तारे क्यों टिमटिमाते हैं ?

तारों का टिमटिमाना वास्तविक में ऐसी कोई घटना है ही नहीं । यह तो हमें सिर्फ प्रतीत होता है ।

पृथ्वी का वायुमंडल शांत कभी नहीं होता है, गर्म तथा ठंडी हवा की धाराएं हमेशा बहती रहती है। ठंडी हवा की अपेक्षा गर्म हवा का घनत्व और अपवर्तनांक कम होता है । इसलिए तारों से प्रेक्षक(देखने वाला) तक पहुंचने वाली किरणें वायुमंडल के अपवर्तनांक में होने वाले परिवर्तनों के कारण अलग-अलग मुड़ जाती है । कभी-कभी मध्यवर्ती वायुमंडल में एकाएक परिवर्तन होने के कारण किरने एक और अधिक विचलित हो जाती है ,जिससे प्रकाश  से प्रेक्षक बहुत थोड़े समय के लिए अंशिता यह पूर्णता कट जाता है । इसलिए तारा कभी कम प्रकाश और कभी अधिक प्रकाश देता हुआ मालूम पड़ता है।

 इस घटना को ही तारों का टिमटिमाना कहते हैं।


👉तारें टिमटिमाते हैं,किंतु चंद्रमा तथा ग्रह नहीं टिमटिमाते हैं क्यों ?

Ans:- जैसा कि हम जानते हैं कि तारों की तुलना में चंद्रमा तथा सभी ग्रह पृथ्वी के बहुत निकट है । फलस्वरुप तारों को प्रकाश का लगभग बिंदु स्रोत समझा जाता है, जबकि चंद्रमा और अन्य ग्रह बहुत बड़ा है । इसलिए चंद्रमा या ग्रह से आती किरणों में वायुमंडलीय अपवर्तन के कारण हुआ थोड़ा विचलन मालूम नहीं पड़ता है ,जिसके कारण चंद्रमा तथा ग्रह नहीं टिमटिमाते हैं








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