विष के दांत total subjective questions and answer 2022, गोधूलि भाग 2

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2 विष के दांत

# नलिन विलोचन शर्मा


   नलिन विलोचन शर्मा का जन्म 18 फरवरी 1916 ईस्वी में पटना के बदरघाट में हुआ था ।वे जन्म से भोजपुरी भाषी थे। उनके पिता का नाम रामावतार शर्मा और माता का नाम रत्नावती शर्मा  था।उनकी स्कूल की पढ़ाई पटना कॉलेजिएट कॉलेज से हुई हुए पटना विश्वविद्यालय में अध्यापक भी रह चुके हैं 12 सितंबर 1961ईस्वी में पटना विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में अध्यक्ष पद पर रहते हुए उनकी मृत्यु  हो गई। 

नलिन विलोचन शर्मा की प्रमुख कृतियां:-
  • दृष्टिकोण
  • साहित्य का इतिहास
  • दर्शन मानदंड
  • विशेषता :प्रेमचंद्र
  • साहित्य तत्व और आलोचना
  • विष के दांत
  • कहानी संग्रह
  • संत परंपरा और साहित्य
  • सदल मिश्र ग्रंथावली
  • अयोध्या प्रसाद खत्री स्मारक ग्रंथ
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प्रस्तुत कहानी विष के दांत के total subjective questions and answer 2022, गोधूलि भाग 2 से संकलित है! 



1.  कहानी के शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।

 Ans:- प्रस्तुत कहानी के शीर्षक विस के दांत एक बहुत ही सार्थक शीर्षक है। कहानी के अंत में। मदन ने जो कासू के। दांत तोड़े हैं। वह महलों वालों को एक संकेत है। 

       यह महल और झोपड़ी की लड़ाई की कहानी है मदन द्वारा पीटे जाने पर काशी के जो दांत टूट जाते हैं वह अमीरों की प्रदर्शन प्रियता और गरीबों पर उनके अत्याचार के विरुद्ध एक चेतावनी है सशस्त्र विद्रोह है इस कहानी का लक्ष्य  है अतः निसंदेह कहा जा सकता है कि विष के दांत इस दृष्टि से बड़ा ही सार्थक शीर्षक है। 


2.  सेन साहब के परिवार में बच्चों के पालन पोषण में किए जा रहे लिंग आधारित भेद-भाव का अपने शब्दों में वर्णन कीजिए। 

Ans:- सिंह साहब एक अमीर इंसान थे उनकी पांच लड़कियां तथा एक लड़का था। इस परिवार में लड़कियों के लिए अलग नियम कानून और शिक्षा थी और लड़के के लिए अलग नियम कानून और शिक्षा । लड़कियों को किसी से बोलने बैठने या फिर हंसने की कोई आजादी नहीं थी, जबकि लड़के के लिए पर्याप्त आजादी थे। इस तरह सेन साहब लड़कियों तथा लड़कों के पालन पोषण में भेदभाव करते थे । 


3.  खोखा किन मामलों में अपवाद था?

Ans:- चुकी खोखा (काशू) का जन्म सेन साहब के अधीर उम्र हो जाने पर हुआ था जिस कारण काशू को बहुत लाड़ प्यार मिलता था। खोखा उनके बुढ़ापे की आंखों का तारा था इसलिए मिसेज सेन और मिस्टर सेन उसे काफी छूट दे रखे थे खोखा जैसे जीवन के नियम का  अपवाद था और इसलिए वह घर के नियमों का भी अपराध था उन पर घर का कोई नियम लागू नहीं होता था। वह खेलने- कुदने, बदमाशीयां करने, कार को गंदा करने, बहनों ड्राइवर को कुछ भी बोलने या उनपे टूट पड़ने के मामलों में अपवाद था। 


4.  सेन दंपति को खोखा में कैसी संभावनाएँ देखते थे और उन संभावनाओं के लिए उन्होंने इसकी कैसी शिक्षा तय की थी?

Ans:- सेन दंपति खोखा में इंजीनियर बनने की संभावनाएं देखते हैं और उन संभावनाओं के लिए उन्होंने इसकी शिक्षा भी इंजीनियर वाली ताई कर रखे थी। इसके लिए उन्होंने अभी से ही उसकी अंगुलियों को औजरों से अवगत कराने को सोच रहे थे। 

5.  सप्रसंग व्याख्या कीजिए:-

(क)   लड़कियां क्या है? कठपुतलियां हैं। और उनके माता पिता को इस बात का गर्व है।

Ans:- प्रस्तुत कहानी के अनुसार लड़कियों को कठपुतलियां कहा गया है इसका मतलब है कि लड़कियां मात्र कठपुतलियां है जो अपने माता पिता और समाज के नियमानुसार अपने जीवन जीते हैं उनके आदर्शों पर चलते हैं अपनी इच्छा के अनुसार कुछ नहीं कर सकते हैं ,अगर ऐसा करें तो उनके माता-पिता भी बहुत गर्व महसूस करते हैं कि उनकी लड़कियां बहुत ही संस्कारी और आज्ञाकारी है। 


(ख)  खोखा के दुर ललित स्वभाव के अनुसार ही सेना ने श्रद्धालुओं को भी बदल दिय। 

Ans:- दूर ललित स्वभाव का मतलब है लाड प्यार में बिगड़ा हुआ कहानी के अनुसार खोखा अपने मां-बाप के लाड प्यार में बहुत बिगड़ा हुआ था और वह किसी भी नियम कानून को नहीं मानता था एक और जहां सेन साहब की पांचों लड़कियों के लिए अलग नियम और अलग शिक्षा छी वही खोखा के लिए अलग नियम और शिक्षा क्योंकि वह उस नियम को मानता ही नहीं था। इसीलिए तो सेन साहब को अपने सिद्धांतों को बदलना पड़ा। 


(ग) ऐसे ही लड़के आगे चल कर गुंडे, चोर ,और डाकू बनाते हैं।

Ans:- यह वाक्य गिरिधर के पुत्र मदन के लिए कहा गया है जब सेन साहब ने गिरधर को अपने घर बुलाया तभी इस बात को सेन साहब ने गिरधर के सामने कहा था। इस वाक्य से पता चलता है कि अमीरों के ख्यालात  गरीबों के प्रति कितने बुरे होते हैं। जहां एक और उनके पुत्र का दुनिया भर की बदमाशियां और शरारतें करते हैं फिर भी उसे अच्छा माना जाता है और दूसरी ओर कोई गरीब बच्चा शरारत करें तो उसे चोर, डाकू और गुंडे बताए जाते हैं। 


(घ)    हंस कौए की जमात में शामिल होने के लिए ललक गया।

Ans:- पक्षियों में हंस एक उच्च श्रेणी का पक्षी माना जाता है, जबकि कौवा को उतनी महत्व नहीं दिया जाता है । कहानी के अनुसार खोखा अर्थात कशू को हंस बताते हुए मदन और उनके दोस्तों को कौवे की जमात कहीं गई है । जब मदन गली में बच्चों के साथ लट्टू खेल रहे थे तब काशू यह देख कर लट्टू खेलने के लिए ललक उठा। 

 

6.  सेन साहब और उनके मित्रों के बीच क्या बातचीत हुई? और पत्रकार मित्र ने उन्हें किस तरह उत्तर दिया?

Ans:- अक्सर ऐसा होता है कि जब कुछ बात करने को ना रह जाए तो लोग अपने बेटे- बेटियों की भविष्य के बारे में बातें करते हैं।

 इसी विषय पर सेन साहब और उनके मित्रों के बीच बातचीत हो रही थी। तभी एक मित्र ने पत्रकार मित्र से पूछा कि आप अपने बेटे को क्या बनाना चाहते हैं, तब पत्रकार महोदय ने बरी शालीनता से जवाब देते हुए कहा-

 "मैं चाहता हूं कि वह जेंटलमैन जरूर बने । जो कुछ बने, उसका काम है, उसे पूरी आजादी रहेगी। 

     ऐसे ही विचार हर मां-बाप का होना चाहिए। बच्चों पर कभी भी अपनी इच्छा का बोझ नहीं डालनी चाहिए। जिस काम में बच्चे निपुण होंगे उस काम को दिल लगाकर जरूर करेंगे और चाहे जिस काम को दिल लगाकर कर दे उसमें सफलता भी उसे जरूर ही मिलेगी। 

7.  मदन और ड्राइवर के बीच के बीच विवाद के द्वारा। कहानीकार क्या बताना चाहते हैं?

Ans:- इस विवाद के द्वारा कहानीकार यह बताना चाहते हैं कि अमीरों के नजर में गरीबों का कोई महत्व नहीं होता है। गरीब तो मात्र एक खिलौना है जिसे खेलने के लिए अमीर उपयोग में लाते हैं। 

अमीरों के नजर में, 

  उनके बच्चे आंखों का तारा होते हैं, 
जबकि गरीबों के बच्चे गुंडा आवारा होते हैं।। 

8.  बस कासु और मदन के बीच झगड़े का क्या कारण था? इस पर संघ के द्वारा लेखक क्या दिखाना चाहता है?

Ans:- मदन और काशू के बीच झगड़े का कारण था कि  जब मदन और उसके दोस्त गलियों में लड्डू नचा रहे थे तब खोखा वहां पहुंचा उसका मन भी लट्टू नचाने के लिए मचल उठा। खोखा ने बड़े रोब के साथ मदन से लट्टु मांगा और  जब मदन ने मना किया तब मदन पर घुसा चला दिया। जो उसे बिल्कुल पसंद नहीं आई , पिछले दिन जो काशू के ड्राइवर ने उसे धक्का दिया था उसकी भी मदन को चिढ़ थी। बस क्या था मदन को तो बस मौके की तलाश थी। वे दोनों झगड़ने लगे इस झगड़े में मदन को तो कुछ नहीं हुआ लेकिन खोखा के दो दांत टूट गए। 

 

9.  महल और झोपड़ी बालों की लड़ाई में अक्सर महल वाले ही जीतते है। पर उसी हालत में जब दूसरे झोपड़ी वाले उनकी मदद अपने ही खिलाफ़ करते हैं। लेखक के इस कथन को कहानी से एक उदाहरण देकर पृष्ठ कीजिए।

Ans:- इसका सटीक उदाहरण यह है कि-

 जब काशू ने रोब में आकर मदन से लट्टू मांगा और नहीं देने पर घुसा चला दिए । जिसके कारण उन दोनों के बीच झगड़े हो गए परंतु उनके दोस्तों ने काशू की मदद नहीं की अगर वह काशू की मदद करते तो शायद उनके विष के दांत नहीं टूटते और फिर महलों वालों की जीत हो जाती।

 इसीलिए लेखक कहते हैं कि महल और झोपड़ी वालों की लड़ाई में अक्सर महलों वालों की ही जीत होती है। पर उसी हालत में जब दूसरे झोपड़ी वाले उनकी मदद अपने ही खिलाफ़ करते हैं।


10.  रोज़ रोज़ अपने बेटे मदन की पिटाई करने वाला गिरधर। मदन द्वारा कासो की पिटाई करने पर उसे दंडित करने की बजाय अपनी छाती से क्यों लगा लेता है?

Ans:- कहानी के अनुसार गिरधर काशू के पिता के कंपनी में एक किरानी था। वह सेन साहब के बर्ताव को भलीभांति जानता था । बच्चे तो अक्सर लड़ते झगड़ते रहते हैं, और काशू के गलती होने के बावजूद भी सेन साहब ने उन्हें नौकरी से निकाल दिया था। भला ऐसा भी होता है क्या की छोटी- मोटी गलती के कारण कोई किसी को नौकरी से निकाल दे।

           इससे सेन साहब का चरित्र और भी स्पष्ट हो गया था। गिरधर को नौकरी से निकालने के अपमान का बदला मदन पहले ले चुका था। इसलिए गिरधर ने मदन को दंडित करने के बजाय उसे छाती से लगा लेता और प्यार भरे शब्द से बोलता है "शाबाश बेटा"


11. 
 सेन साहब, मदन कासु और गिरधर का चरित्र चित्रण करें।


Ans:- सेन साहब- सेन साहब एक अमीर बिजनेसमैन था जो अपनी महत्वाकांक्षा और सफेदपोशी के भीतर लिंग-भेद जैसे कुसंस्कार छिपाये हुए हैं 

मदन- मदन गरीब बाप का एक ढिट औलाद था। वह बहुत बुरा नहीं तो बहुत अच्छा भी नहीं था ।पर अपने साथियों में सबका लीडर था

 काशू - काशू अमीर बाप का एक बिगड़ा हुआ औलाद था, जो अपने मां-बाप के लाड प्यार में सर चढ गया था। उसे ना तो छोटे बड़े की लिहाज थी और ना ही किसी से कोई डर 

गिरधर- 

 गिरधर एक नौकरीपेशा निम्न मध्यवर्गीय व्यक्ति  था जो अनेक तरह की थोपी गयी बंदिशों के बीच भी अपने अस्तित्व को बहादुरी एवं साहस के साथ बचाये रखने के लिए संघर्षरत था। 


12.  आपकी दृष्टि में कहानी का नायक कौन है? तर्कपूर्ण उत्तर दें।

Ans:- हमारी दृष्टि में कहानी का नायक मदन है।

 चुकी किसी कहानी का नायक वही होता है, जो कहानी में मुख्य भूमिका निभाता है। इस कहानी में मदन की भूमिका अहम है। इसमें मदन ने ही कुछ नायकों वाले काम किया है। 


13. आरंभ से ही कहानीकार का स्वर ब्यङ्ग पूर्ण है। ऐसे कुछ परमाणु उपस्थित करें।

Ans:- विष के दाँत’ कहानी के प्रारंभ में मोटर कार की बात की प्रस्तुति व्यंग्यात्मक शैली में है। उनके लड़कियाँ के गुणों की चर्चा, सेन साहब द्वारा खोखा को एक इंजीनियर के रूप मे
देखना, उसकी हमेशा प्रशंसा करना भी लेखक का व्यंग्य ही है ।


14. विष के दांत कहानी का सारांश लिखें।

Ans:- कहानी बिष के दांत शीर्षक महल और झोपड़ी की लड़ाई की कहानी है एक ओर अमीर परिवार के मुखिया का प्रतिनिधित्व सेन साहब करते हैं तो दूसरी ओर गरीब परिवार के मुखिया का प्रतिनिधित्व गिरधर किरानी करते हैं, इस कहानी का नायक मदन और विलन का रोल काशू निभाता है।          यह कहानी  मध्यवर्ग के अनेक अंतर्विरोधों को उजागर करती है । कहानी का जैसा ठोस सामाजिक संदर्भ है, वैसा ही स्पष्ट मनोवैज्ञानिक आशय भी । आर्थिक कारणों से मध्यवर्ग के भीतर ही एक ओर सेन साहब जैसों की एक श्रेणी उभरती है जो अपनी महत्वाकांक्षा और सफेदपोशी के भीतर लिंग-भेद जैसे कुसंस्कार छिपाये हुए हैं तो दूसरी ओर गिरधर जैसे नौकरीपेशा निम्न मध्यवर्गीय व्यक्ति की श्रेणी है जो अनेक तरह की थोपी गयी बंदिशों के बीच भी अपने अस्तित्व को बहादुरी एवं साहस के साथ बचाये रखने के लिए संघर्षरत है । यह कहानी सामाजिक भेद-भाव, लिंग-भेद, आक्रामक स्वार्थ की छाया में पलते हुए प्यार-दुलार के कुपरिणामों को उभारती हुई सामाजिक समानता एवं मानवाधिकार की महत्त्वपूर्ण बानगी पेश करती है।

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गधखंड:

 

लेखक

गध

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