"धरती कब तक घूमेगी " यह कहानी तीन बेटे, दो रोटी और एक मां की कहानी है। इस पाठ के लेखक सांवर दइया है। यह एक राजस्थानी कहानी है इसके अनुवादक भी सांवर दइया ही है। इस कहानी की मुख्य पात्रा सीता है | सीता के तीन बेटे कैलाश, नारायण एवं बिरजू हैं । कैलाश की पत्नी राधा, नारायण की पत्नी भवरी और बिरजू की पत्नी पुष्पा हैं। सीता अपने काले ओढ़ने को देख कर रूआसी हो जाती है। उनके बेटे ने भी सीता को एक-एक महीने खिलाने का नियम बनाया था जब सीता के बेटे उन्हें एक-एक महीने करके सबके यहां खाने की बात करता है तो सीता काफी उदास हो जाती है ।
- 'धरती कब तक घूमेगी 'इस पाठ के लेखक कौन है ? उत्तर -सांवर दइया
- 'धरती कब तक घूमेगी' यह किस भाषा से अनूदित है? उत्तर -राजस्थानी
- सांवर दइया किस भाषा के सफल कहानीकार हैं ? उत्तर - राजस्थानी
- 'धरती कब तक घूमेगी' कहानी के अनुवादक कौन है?उत्तर- सांवर दइया
- 'धरती कब तक घूमेगी' इस बात की मुख्य पात्र कौन है ?उत्तर -सीता
- सीता के कितने पुत्र थे ? उत्तर - तीन
- सीता के सबसे बड़े लड़के का नाम क्या था ? उत्तर- कैलाश
- सीता के सबसे छोटे लड़के का नाम क्या था? उत्तर- बिरजू
- कौन अपना काला ओढ़ना देखकर रुआंसी हो गई थी ?उत्तर-सीता
- 'धरती कब तक घूमेगी' शीर्षक कहानी में किसे महसूस होनेलगा की आकाश अनंत नहीं है ? उत्तर- सीता को
- सीता के बेटों ने सीता को कितने रुपए महावारी खर्च देने का निर्णय लिया ? उत्तर- 50रु
- किस दिन सीता को लगा की लापसी बिल्कुल फीकी है ? उत्तर - नाहरसिंह वाले दिन
- सीता रुआंसी क्यों हो गई ? उत्तर - अपना काला ओढना देखकर
- तीन बेटे, दो वक्त की रोटी और एक मां किस कहानी की पंक्ति है ? उत्तर - धरती कब तक घूमेगी
- तीन बेटे की मां कौन थी ? उत्तर- सीता
- 'धरती कब तक घूमेगी' कहानी कैसी कहानी है?उत्तर - सामाजिक
- एक दिन घर छोड़कर कौन चली गई ? उत्तर - सीता
- सीता को रसमलाई किसने खिलाई थी ? उत्तर- भंवरी ने
- सीता को दाल के हलुए किसने खिलाए थे ? उत्तर -राधा ने
- कैलास की पत्नी कौन थी ? उत्तर -राधा
- बिरजू की पत्नी कौन थी ? उत्तर -पुष्पा
- रोटी दो - रोटी दो का खेल किस कहानी में बच्चे खेलते हैं ? उत्तर - धरती कब तक घूमेगी
- माँ कब से खाना अलग बनाकर खाएगी? उत्तर - आज दोपहर से
- यह बात अच्छी नहीं लगती की मां महीने भर इधर-उधर लुढ़कती रहे यह किसने कहा ? उत्तर - कैलाश ने
- कौन अपने ही घर में घुटन महसूस करती है ? उत्तर -सीता
- किस कहानी में रोटी का सवाल था ? उत्तर– धरती कब तक धुमेगी
- भर आई आंखें पोछ कर किसने आकाश की ओर देखा ? उत्तर -सीता ने
♥️लघुउत्तरीय प्रश्न
Q-सीता अपने ही घर में क्यों घुटन महसूस करती है ?
उत्तर -सीता अपने ही घर में घुटन महसूस करती है क्योंकि सीता का इतना बड़ा परिवार होने के बावजूद भी परिवार के लोग सीता से अच्छे से बातचीत नहीं करते हैं ना उनके बेटे ना उनकी बहुएं |
Q-पाली बदलने पर अपने घर दादी मां के खाने को लेकर बच्चे खुश होते हैं जबकि उनके माता-पिता नाखून | बच्चे की खुशी और माता-पिता की नाखुशी के कारण पर विचार करें ।
उत्तर- बच्चों के हृदय में अपनी दादी के लिए प्यार है। अतः पाली बदलने पर बच्चे हर्षित होकर उसके पास आते और कहते दादी जी कल से आप हमारे घर खाना खाओगी हम साथ - साथ खाएंगे बच्चों के लिए दादी का शागिर्द और प्यार आनंददायक था। अतः वे खुश होते पर उसके बेटे एवं बहुएं अपनी मां को बोझ समझते थे इसलिए वे नाखुश होते थे।
Q-'इस समय उसकी आंखों के आगे ना तो अंधेरा था और ना ही उसे धरती और आकाश के बीच घुटन हुई।' -प्रसंग व्याख्या करें।
उत्तर-यह पंक्ति "धरती कब तक घूमेगी " पाठ से लिया गया है । यह एक राजस्थानी कहानी है। इस पाठ के लेखक सांवर दइया हैं। जब सीता को लगता है कि वह अपने बेटे और बहू पर बोझ बन गई है, तो वह एक दिन अपने घर को छोड़कर निकल जाती है और 'उस समय उसकी आंखों के आगे ना तो अंधेरा था और ना ही उसे धरती और आकाश के बीच घुटन महसूस हुई |
Q-सीता का चरित्र चित्रण करें |
उत्तर- सीता तीन बेटे, तीन बहुएं एवं कई पोते-पोतियो वाली एक विधवा औरत है। जिसे केवल दो रोटी के लिए परिवार में यातनाएं सहनी पड़ती है | अकेले बूढ़ी मां तीन बेटे पर भारी पड़ जाती है। सीता के बेटे मां की रोटी के लेकर अलग-अलग नियम बनाते हैं और अंत में एक दिन सीता घर को छोड़कर चली जाती है।
Q-'धरती कब तक घूमेगी' शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट करें
उत्तर- कहानी का शीर्षक " धरती कब तक घूमेगी" घटना प्रधान है | सीता अपने बेटे और उसके बहुओं की यातनाएं सहते- सहते परेशान हो जाती है । उसे अपना पूर्व का जीवन स्मरण हो जाता है। वह आकाश की ओर दृष्टि उठाकर देखती है और फिर पृथ्वी की ओर देखकर महसूस किया कि पृथ्वी और आकाश के बीच घुटन भरी हुई है दो रोटियां ही सब कुछ नहीं इनके अलावा भी तो कुछ है और वही अलावे वाली इच्छा ही तो दुख भोगने का बाध्य करती है। सीता को आशा है कि धरती घूमेगी पर कब तक घूमेगी पता नहीं । यही शीर्षक की सार्थकता है ।

